Skip to content

मनोले मिस्त्री की कहनी

Kindle

– निकोलाय ज़्बेरिया (१९०८-१९९०) –

काले राजा ने कृत्यांदे आजेश का मठ बनवाया थ। वे चाहते कि वह मठ दुनियां में सबसे सुन्दर हो और मनोले एक मुख्य मिस्त्री ने उनकी इच्छा पूरी करने का वायदा किया।

कहानी इस प्रकार से है कि उस मठ के निर्मण करने में मनोले मिस्त्री को बहुत बड़ी कठिनैयां और कष्ट सहने पड़े।

जो कुछ वह दिन को बनाता था वह रात को गिर जाता था।

एक रात में मनोले ने एक महात्मा को स्वप्न में देखा, जिसने उसने कहा , तुम्हारा मामला मानवी बलिदान मांगता है। जब तक तुम दीवार में एक प्राणी को ज़िन्दा नहीं चुनाओगे, तब तक तुम्हारा काम पूरा नहीं होगा।

दुसरे दिन उसने अपने साथियों को यह स्वप्न सुनाया। उन्होंने आपस में सलाह करके यह फ़ैसला किया कि अगले दिन जिसकी पत्नी या बहिन खाना लेकर सबसे पहले आयेगी उसे दीवार में चुन दिया जायेगा।

यद्यापि उन्होंने आपने निश्चय के बारे में घत पर किसि को नहीं बताने की शपथ खाई थी, तो भी केवल मनोले ने शपथ का पालन किया।

दुसरे दिन, पहले जो खाने को लाती देखी गैडइ, वह मनोले की पत्नी थी।

निराश होकर, मनोले ईश्वर से प्रार्थना लगा कि वे बड़ी बारिश करें, ताकि वह रास्ते में रुक जाये।

तद्यपि ईश्वर ने बड़ी बारिश की पर मनोले पत्नी रुकी नहीं।

जब मनोले ने इश्वर से फिर प्रार्थना की कि वे वायु बुलाये, लेकिन हवा भी मिस्त्री पत्नी को रुक न सकी।

जब वह चबूतरे पर पहुँची तो मनोले ने उसको चूमा और मजाक करते हुये, उसे निंव पर रखकर चुनाने लगा। शुरू में मनोले की पत्नी सोच रही थी कि वह मज़ाक कर रहा है, लेकिन जब उसने देखा कि उसके इर्दगिर्द दीवार उठती जा रही है, तो वह रोने लगी।

मनोले मनोले’ मिस्त्री मनोले। दीवार मुझे जोर से दबा रही है मेरी देहिया तोड़ रही है।

लेकिन मनोले दीवार तब तक चुनता गया जब तक वह उसे दीवार में बुरी तरह बंद न कर चुका। आंततः उसे केवल अपनी पत्नी के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ रही थी।

मनोले मनोले’ मिस्त्री मनोले दीवार मुझे जोर से दबा रही है” मेरी देहियाँ तोड़ रही है मेरा जीवन दीप बुझ रहा है।

काले राजा ने नया मठ देखकर , मनोले को बधाई दी और उसकी प्रशंसा की, पर उसी समय उससे पूच्छा क्या तुम और अधिक सुन्दर मठ बना सकते हो?

मनोले के हां कहने पर, काले राजा ने बड़े गुस्से में आकर हुक्म दिया कि सब चबूतरों से सीढ़ियों को हटा दिया जाये ताकि मनोले छत पर ही मर जाये। बचने के लिये मनोले बरीक तख्तों के परतों को बनाकर उड़ने की कोशिश की पर वह नीचे गिर कर मर गया।

पुरानी कहानी के कथानुसार, जिस जगह मनोले गिरा वहाँ पारदशंक और नमकीन पानी का स्रोत बहने लगा। लोग कहते हैं कि मनोले और उसकी पत्नी के आंसुओं के कारण इस स्रोत का पानी नमकीन है।

जब पर्यटक उस स्रोत को देखते हैं तो सभी को इस घटना पर विश्वास सा हो जाता है॥

Kindle